एनएससी क्या है: 7.7% ब्याज, 5 साल का आसान पूरा गणित

पाँच साल बाद कितना पैसा वापस मिलेगा, यह जानना उसी सवाल का जवाब है। इस गाइड में National Savings Certificate (NSC) की पूरी जानकारी आसान भाषा में मिलेगी — ब्याज दर, निवेश की सीमा, टैक्स का फायदा, समय से पहले बंद करने के नियम और निवेश करने का तरीका, सब कुछ एक जगह।

✅ यह गाइड आधिकारिक सरकारी स्रोतों और अधिसूचनाओं पर आधारित है। Last verified: 4 November 2026। NSC से जुड़ी ब्याज दर, नियम और प्रक्रिया समय-समय पर बदल सकती है — कोई कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम जानकारी ज़रूर क्रॉस-चेक करें।

30 सेकंड में जवाब: NSC भारत सरकार की छोटी बचत योजना है जो डाकघरों से मिलती है। इस पर अक्टूबर–दिसंबर 2026 की तिमाही में 7.7% सालाना ब्याज मिल रहा है, पैसा 5 साल के लिए जमा रहता है और ब्याज हर साल जुड़कर मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है।

  • ब्याज दर: 7.7% सालाना, सालाना चक्रवृद्धि, मैच्योरिटी पर भुगतान।
  • अवधि: 5 साल, खरीद के दिन वाली दर पूरे 5 साल लागू रहती है।
  • न्यूनतम निवेश: ₹1,000, उसके बाद ₹100 के गुणकों में; अधिकतम सीमा नहीं है।
  • टैक्स: निवेश पर Section 80C छूट (पुरानी टैक्स व्यवस्था में, कुल ₹1.5 लाख की सीमा के अंदर)।
  • मैच्योरिटी: ₹10,000 पर 5 साल बाद लगभग ₹14,490 मिलते हैं।
एक नज़र में जानकारी
योजना National Savings Certificate (VIII Issue), भारत सरकार की छोटी बचत योजना
कहाँ से मिलती है किसी भी डाकघर से, और डाकघर इंटरनेट बैंकिंग से भी (बचत खाता धारकों के लिए)
ब्याज दर (अक्टूबर–दिसंबर 2026) 7.7% सालाना, सालाना चक्रवृद्धि, मैच्योरिटी पर भुगतान
अवधि 5 साल (फिक्स्ड, खरीद के दिन की दर पूरे 5 साल लागू)
न्यूनतम / अधिकतम निवेश न्यूनतम ₹1,000 (₹100 के गुणकों में); अधिकतम की कोई सीमा नहीं
टैक्स लाभ Section 80C के तहत निवेश पर छूट (पुरानी व्यवस्था में); पहले 4 साल का ब्याज भी पुनर्निवेश मानकर छूट योग्य; 5वें साल का ब्याज टैक्स योग्य; कोई TDS नहीं

एनएससी क्या है और यह कैसे काम करता है?

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) भारत सरकार की एक छोटी बचत योजना है जो डाकघरों के माध्यम से मिलती है। इसमें एक बार पैसा जमा किया जाता है, उस पर हर साल ब्याज जुड़ता है और पाँच साल पूरे होने पर जमा रकम के साथ पूरा ब्याज एक साथ मिलता है।

NSC को समझना बहुत आसान है। आप डाकघर में एक बार पैसा जमा करते हैं, सरकार उस पैसे पर तय ब्याज दर से हर साल ब्याज जोड़ती जाती है, और 5 साल पूरे होने पर जमा रकम और सारा ब्याज एक साथ वापस मिलता है। बीच में कोई किस्त नहीं देनी होती और न ही ब्याज हर महीने या हर साल हाथ में आता है — सब कुछ मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है।

इस समय सिर्फ NSC VIII Issue खुला हुआ है। पुराना NSC IX Issue दिसंबर 2015 में बंद हो गया था, इसलिए अब नया निवेश सिर्फ VIII Issue में ही होता है। जब कोई NSC की बात करता है, तो उसका मतलब आज की तारीख में यही 5 साल वाला VIII Issue होता है।

NSC की सबसे बड़ी खासियत इसका सरकारी भरोसा है। यह पैसा भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं के तहत जमा होता है, इसलिए इसमें बैंक FD जैसी संस्था-विशेष की चिंता नहीं रहती। Sarkari Sakha पर हम कोशिश करते हैं कि ऐसी सरकारी बचत योजनाओं की जानकारी आसान भाषा में मिले, ताकि फैसला लेने से पहले नियम साफ समझ आ जाएँ।

NSC उन लोगों के लिए बना है जो 5 साल तक पैसा नहीं छूना चाहते और बदले में तयशुदा, सुरक्षित ब्याज चाहते हैं।

एनएससी पर अभी कितना ब्याज मिल रहा है?

सीधा जवाब:अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए NSC पर 7.7% सालाना ब्याज तय है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 30 सितंबर 2026 के कार्यालय ज्ञापन में इस तिमाही की सभी छोटी बचत दरें पहले जैसी ही  रखी हैं, यानी NSC की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह दर अप्रैल 2023 से लगातार 7.7% पर ही चल रही है।

यहाँ एक बात समझना सबसे ज़रूरी है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें हर तिमाही में तय होती हैं, पर NSC में खरीद के दिन जो दर लागू होती है, वही पूरे 5 साल चलती है। इसका मतलब यह है कि अगर आप अक्टूबर–दिसंबर 2026 की तिमाही में NSC खरीदते हैं, तो आपके पैसे पर पूरे 5 साल तक 7.7% ही लगेगा, चाहे बाद की तिमाहियों में दर घटे या बढ़े।

अगली दर समीक्षा दिसंबर 2026 के अंत में होगी, जो जनवरी–मार्च 2027 की तिमाही के लिए लागू होगी। इसलिए जो लोग मौजूदा दर पर निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए दिसंबर 2026 के खत्म होने से पहले खरीदना मायने रखता है — पर सिर्फ दर देखकर जल्दबाज़ी में निवेश करना भी सही नहीं है, पहले अपनी ज़रूरत और 5 साल की अवधि को भी तौल लें।

छोटी बचत योजना (अक्टूबर–दिसंबर 2026) ब्याज दर NSC से फर्क
NSC (VIII Issue) 7.7% सालाना 5 साल फिक्स्ड, ब्याज मैच्योरिटी पर
PPF (Public Provident Fund) 7.1% सालाना 15 साल की लंबी अवधि, ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री
किसान विकास पत्र (KVP) 7.5% सालाना पैसा लगभग 115 महीनों में दोगुना होता है
पोस्ट ऑफिस RD (5 साल, Recurring Deposit) 6.7% सालाना हर महीने किस्त जमा होती है, एकमुश्त नहीं
पोस्ट ऑफिस MIS (Monthly Income Scheme) 7.4% सालाना ब्याज हर महीने मिलता है, मैच्योरिटी पर नहीं
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 8.2% सालाना सिर्फ पात्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए है

इस तुलना से एक बात साफ होती है। NSC की दर PPF से थोड़ी ज़्यादा है, पर PPF का ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है जबकि NSC के 5वें साल के ब्याज पर टैक्स लगता है। इसलिए सिर्फ दर देखकर फैसला न करें — टैक्स वाला हिस्सा भी साथ में देखें, जो आगे टैक्स वाले हिस्से में समझाया गया है।

एनएससी में कौन निवेश कर सकता है और कौन नहीं?

NSC सिर्फ व्यक्तियों के लिए है। कोई भी भारतीय निवासी व्यक्ति अपने नाम से, संयुक्त रूप से या नाबालिग की ओर से अभिभावक के रूप में NSC खरीद सकता है। यही वजह है कि यह योजना आम परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे बचतकर्ताओं के बीच इतनी लोकप्रिय है।

कौन निवेश कर सकता है कैसे
कोई भी वयस्क भारतीय निवासी अपने नाम से Single Holder खाता खोलकर
संयुक्त निवेशक (अधिकतम 3 वयस्क) Joint A (सभी धारकों को संयुक्त रूप से या उत्तरजीवी को देय) या Joint B (किसी भी धारक या उत्तरजीवी को देय) के रूप में
10 साल या उससे बड़े नाबालिग नियमानुसार अपने नाम से खाता खोल सकते हैं
नाबालिग या मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्ति की ओर से अभिभावक अभिभावक के रूप में खाता खोलकर
NRI, HUF, ट्रस्ट, कंपनी नया NSC नहीं खरीद सकते — ये श्रेणियाँ पात्र नहीं हैं

एक अपवाद जानना ज़रूरी है। अगर कोई व्यक्ति NSC खरीदने के बाद NRI बन जाता है, तो वह अपना मौजूदा NSC मैच्योरिटी तक रख सकता है — पर नया NSC नहीं खरीद सकता। निवास की स्थिति बदलने पर डाकघर से मौजूदा नियम ज़रूर पूछ लें, क्योंकि इस बारे में प्रक्रिया समय-समय पर स्पष्ट की जाती है।

नामांकन (nomination) की सुविधा भी है। NSC खरीदते समय या बाद में आप किसी को नामांकित कर सकते हैं, जिसमें नाबालिग भी शामिल हो सकता है, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में पैसा सही व्यक्ति तक पहुँचे। नामांकन का फॉर्म भरना छोटा काम है, पर यह परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा बनता है।

एनएससी में कितना पैसा लगा सकते हैं?

NSC की शुरुआत सिर्फ ₹1,000 से हो जाती है। इसके बाद आप ₹100 के गुणकों में कोई भी रकम लगा सकते हैं — जैसे ₹1,100, ₹5,000 या ₹1,00,000। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, यानी आप चाहें तो ₹10 लाख भी एक साथ लगा सकते हैं।

पर यहाँ एक फर्क समझना ज़रूरी है। निवेश की कोई सीमा नहीं है, पर टैक्स छूट की सीमा है। Section 80C के तहत कुल छूट ₹1.5 लाख सालाना तक ही मिलती है, और उसमें PPF, ELSS, जीवन बीमा प्रीमियम जैसी सारी 80C चीज़ें मिलाकर गिनी जाती हैं। इसलिए ₹5 लाख का NSC खरीदना मुमकिन है, पर 80C छूट सिर्फ ₹1.5 लाख की कुल सीमा के अंदर ही मिलेगी।

एक NSC खाते में एक बार ही पैसा जमा होता है। उसी खाते में बाद में और पैसा नहीं डाला जा सकता — और निवेश करना हो तो नया NSC खाता खोलना होता है। अच्छी बात यह है कि आप कितने भी NSC खाते खोल सकते हैं, बशर्ते KYC और नियम पूरे हों।

जब कोई पहली बार NSC के बारे में सुनता है, तो सबसे आम उलझन यही होती है कि कम रकम से शुरुआत करना सही रहेगा या बड़ी रकम से। इसका जवाब आपकी ज़रूरत पर निर्भर करता है — अगर 5 साल तक पैसा नहीं चाहिए और टैक्स बचाना है, तो ₹1.5 लाख तक की रकम 80C के लिहाज़ से समझदारी भरी मानी जाती है, पर यह कोई सलाह नहीं है, सिर्फ नियमों की जानकारी है।

एनएससी में निवेश कैसे करें?

NSC खरीदने का सबसे पक्का तरीका डाकघर जाना है। आप अपने नज़दीकी डाकघर में जाकर NSC खाता खोल सकते हैं — इसके लिए डाकघर बचत खाता होना ज़रूरी नहीं है, पर KYC दस्तावेज़ ज़रूर चाहिए। प्रक्रिया सीधी है और आमतौर पर एक ही बार में पूरी हो जाती है।

  1. नज़दीकी डाकघर जाएँ और NSC खाता खोलने का फॉर्म (Form-1) लें। यह फॉर्म India Post की वेबसाइट पर भी मिलता है, पर डाकघर से लेना आसान रहता है।
  2. फॉर्म में अपना नाम, पता, निवेश की रकम और नामांकन (nominee) की जानकारी भरें। संयुक्त खाता हो तो सभी धारकों के विवरण भरें।
  3. KYC दस्तावेज़ साथ ले जाएँ — Aadhaar नंबर और PAN आमतौर पर माँगे जाते हैं, साथ में एक हालिया फोटो भी रखें। छोटी रकम पर वैकल्पिक फॉर्म के बारे में डाकघर से ही पूछ लें।
  4. निवेश की रकम नकद, चेक या डाकघर बचत खाते से जमा करें। खाता उसी दिन की रकम से खुलता है, इसलिए भुगतान उसी दिन पूरा करना होता है।
  5. जमा की रसीद और खाते का विवरण सँभालकर रखें। आजकल NSC ज़्यादातर e-mode या पासबुक mode में जारी होता है, पुराने ज़माने वाला कागज़ी सर्टिफिकेट अब आम नहीं है।

ऑनलाइन खरीदने का विकल्प भी बताया जाता है। जिन लोगों का डाकघर बचत खाता और DOP इंटरनेट बैंकिंग चालू है, वे इंटरनेट बैंकिंग में General Services के अंदर NSC खाता खोलने का विकल्प देख सकते हैं, जहाँ रकम और नामांकित व्यक्तिजा की नकारी भरकर OTP से लेनदेन पूरा किया जाता है। पर यह विकल्प हर खाते में एक जैसा नहीं दिखता, इसलिए अगर ऑनलाइन विकल्प न दिखे तो डाकघर जाकर खरीदना ही सबसे भरोसेमंद रास्ता है।

निवेश से पहले यह चेकलिस्ट एक बार देख लें, ताकि डाकघर के चक्कर न लगें:

  • Form-1: NSC खाता खोलने का आवेदन फॉर्म, सही-सही भरा हुआ।
  • Aadhaar: Aadhaar नंबर, KYC के लिए।
  • PAN: PAN कार्ड, ज़्यादातर मामलों में ज़रूरी।
  • फोटो: हालिया पासपोर्ट साइज़ फोटो।
  • पता प्रमाण: Aadhaar, पासपोर्ट, बिजली बिल या बैंक स्टेटमेंट में से जो लागू हो।
  • भुगतान: निवेश की पूरी रकम — नकद, चेक या बचत खाते से।
  • नामांकन: नामांकित व्यक्ति का नाम और संबंध, पहले से तय करके रखें।

मैच्योरिटी पर कितना पैसा मिलेगा?

एनएससी क्या है, यह समझने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि 5 साल बाद हाथ में कितना पैसा आएगा। NSC का हिसाब सालाना चक्रवृद्धि से होता है। इसका मतलब यह है कि हर साल का ब्याज मूल रकम में जुड़ जाता है और अगले साल ब्याज उस बढ़ी हुई रकम पर लगता है। 7.7% की दर से 5 साल बाद मिलने वाली रकम का हिसाब नीचे दी गई टेबल में है — ये आँकड़े लगभग हैं, क्योंकि अंतिम पैसा डाकघर की गणना के अनुसार ही मिलता है।

निवेश की रकम 5 साल बाद लगभग मैच्योरिटी रकम लगभग ब्याज
₹1,000 ₹1,449 ₹449
₹10,000 ₹14,490 ₹4,490
₹50,000 ₹72,452 ₹22,452
₹1,00,000 ₹1,44,903 ₹44,903
₹1,50,000 ₹2,17,355 ₹67,355
₹5,00,000 ₹7,24,515 ₹2,24,515

एक उदाहरण से समझें। अगर आप ₹1,00,000 का NSC खरीदते हैं, तो 7.7% सालाना चक्रवृद्धि से 5 साल बाद आपको लगभग ₹1,44,903 मिलेंगे, यानी लगभग ₹44,903 ब्याज के रूप में जुड़ेगा। ₹10,000 पर यही हिसाब ₹14,490 बनता है — यही वह आँकड़ा है जो वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में भी दिया गया है।

मैच्योरिटी पर एक और बात जान लें। NSC अपने आप आगे नहीं बढ़ता (auto-renew नहीं होता)। 5 साल पूरे होने पर पैसा वापस मिलता है, और अगर आगे भी निवेश जारी रखना है तो नया NSC खरीदना होता है। मैच्योरिटी का पैसा लेने के लिए खाते का विवरण और पहचान प्रमाण के साथ डाकघर जाना होता है — मैच्योरिटी से पहले ही यह कागज़ तैयार रखना समझदारी है।

एनएससी पर टैक्स का पूरा गणित

NSC  का टैक्स वाला हिस्सा थोड़ा अलग है, और इसी वजह से लोग इसमें उलझ जाते हैं। सीधा नियम यह है — निवेश पर Section 80C की छूट मिलती है, पहले 4 साल का ब्याज भी छूट के दायरे में आ जाता है, और सिर्फ 5वें साल के ब्याज पर टैक्स लगता है।

सीधा जवाब: National Savings Certificate (NSC) में निवेश पर पुरानी टैक्स व्यवस्था में Income-tax Act, 1961 की Section 80C के तहत छूट मिलती है, कुल ₹1.5 लाख सालाना की सीमा के अंदर। NSC के ब्याज पर कोई TDS नहीं कटता; 5वें साल का ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है।

क्या टैक्स नियम
निवेश की रकम Section 80C के तहत छूट, कुल ₹1.5 लाख सालाना की सीमा के अंदर (पुरानी टैक्स व्यवस्था में)
पहले 4 साल का ब्याज ब्याज को पुनर्निवेश माना जाता है, इसलिए वह भी 80C छूट के योग्य होता है (कुल सीमा के अंदर)
5वें साल का ब्याज पुनर्निवेश नहीं होता, इसलिए पूरी तरह टैक्स योग्य — अपने स्लैब के हिसाब से “Income from Other Sources” में जोड़कर टैक्स देना होता है
TDS NSC के ब्याज पर कोई TDS नहीं कटता — टैक्स की ज़िम्मेदारी निवेशक की ही रहती है, ITR में ब्याज दिखाना होता है
नई टैक्स व्यवस्था नई व्यवस्था में Section 80C की छूट नहीं मिलती, इसलिए NSC वहाँ सिर्फ सुरक्षित 7.7% वाला निवेश रह जाता है, टैक्स-बचत वाला नहीं

यहाँ एक आम गलती से बचें। कई लोग सोचते हैं कि NSC का पूरा ब्याज टैक्स-फ्री है, क्योंकि पहले 4 साल का ब्याज छूट में आ जाता है। सच यह है कि 5वें साल का ब्याज टैक्स योग्य होता है और उसे ITR में दिखाना होता है। TDS न कटने का मतलब टैक्स न लगना नहीं है — इसका मतलब सिर्फ यह है कि टैक्स आपको खुद भरना है।

पुरानी और नई व्यवस्था का फर्क भी साफ रखें। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था में हैं और 80C की सीमा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो NSC का टैक्स फायदा पूरा मिलता है। अगर आप नई व्यवस्था में हैं, तो NSC में 80C का फायदा नहीं मिलेगा — तब फैसला सिर्फ सुरक्षा और ब्याज दर के आधार पर करें, टैक्स बचत के आधार पर नहीं।

एनएससी बनाम PPF और FD — कौन कब बेहतर है?

एनएससी क्या है, यह जानने के बाद अगला सवाल यही आता है कि यह PPF या FD से बेहतर है या नहीं। NSC, PPF और बैंक FD — तीनों सुरक्षित माने जाते हैं, पर तीनों का काम अलग है। NSC 5 साल का एकमुश्त निवेश है, PPF 15 साल का लंबा निवेश है और FD बैंक के हिसाब से अलग-अलग अवधि की होती है। कौन सा बेहतर है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा कितने समय के लिए चाहिए और टैक्स की स्थिति क्या है।

तुलना NSC PPF बैंक FD
ब्याज दर (अक्टूबर–दिसंबर 2026) 7.7% सालाना 7.1% सालाना बैंक और अवधि के हिसाब से अलग-अलग
अवधि 5 साल फिक्स्ड 15 साल (आगे बढ़ाई जा सकती है) कुछ दिन से लेकर 10 साल तक
निवेश का तरीका एकमुश्त, एक बार हर साल किस्तों में (₹1.5 लाख सालाना तक) एकमुश्त, अवधि चुनकर
टैक्स निवेश पर 80C छूट; 5वें साल का ब्याज टैक्स योग्य; कोई TDS नहीं निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी — तीनों टैक्स-फ्री (EEE) ब्याज टैक्स योग्य; सीमा से ऊपर TDS भी कट सकता है
समय से पहले निकासी आम तौर पर नहीं (सिर्फ 3 खास स्थितियाँ) 7वें साल से आंशिक निकासी संभव आमतौर पर संभव, जुर्माने के साथ
किसके लिए सही 5 साल का तय लक्ष्य, टैक्स बचत (पुरानी व्यवस्था में) लंबी अवधि की रिटायरमेंट बचत कम अवधि की ज़रूरत, जल्दी पैसा चाहिए हो तो

सीधा निष्कर्ष यह है कि 5 साल के लक्ष्य के लिए NSC एक मज़बूत विकल्प है, लंबी अवधि के लिए PPF का टैक्स-फ्री ढाँचा भारी पड़ता है, और कम अवधि के लिए FD की लचीलापन काम आती है। तीनों को एक ही तराज़ू पर तौलना गलत होगा — पहले यह तय करें कि पैसा कब चाहिए, फिर योजना चुनें।

समय से पहले NSC बंद कराना हो तो क्या होगा?

NSC में 5 साल का लॉक-इन होता है, और आम तौर पर समय से पहले निकासी नहीं होती। यही इस योजना की सबसे सख्त शर्त है, इसलिए निवेश करने से पहले यह पक्का कर लें कि यह पैसा 5 साल तक नहीं चाहिए।

समय से पहले बंद करना सिर्फ इन खास स्थितियों में ही संभव है:

  • खाताधारक की मृत्यु: खाताधारक (या सभी संयुक्त धारकों) की मृत्यु होने पर खाता समय से पहले बंद किया जा सकता है।
  • न्यायालय का आदेश: किसी न्यायालय के आदेश पर समय से पहले बंद करना संभव है।
  • गिरवी रखने वाले राजपत्रित अधिकारी द्वारा ज़ब्ती: जब NSC किसी राजपत्रित अधिकारी के पक्ष में गिरवी रखा गया हो और वह उसे ज़ब्त करे, तब भी समय से पहले बंद हो सकता है।

इन तीनों के अलावा किसी भी वजह से — जैसे पैसों की अचानक ज़रूरत, बेहतर ब्याज वाली योजना मिलना या बाज़ार में बदलाव — NSC को समय से पहले बंद नहीं कराया जा सकता। यही वजह है कि NSC में वही पैसा लगाना समझदारी है जिसकी 5 साल तक ज़रूरत न हो।

अगर ऐसी कोई खास स्थिति आ ही जाए, तो डाकघर जाकर योजना के नियमों के अनुसार आवेदन करना होता है। इस दौरान मिलने वाली रकम की गणना डाकघर ही नियमों के हिसाब से करेगा, इसलिए पहले से किसी खास रकम का अनुमान लगाकर फैसला न करें — डाकघर से लिखित जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें।

NSC खरीदने के बाद क्या सँभालकर रखें?

एनएससी क्या है, यह जानना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह जानना है कि खरीदने के बाद क्या सँभालकर रखना है। NSC खरीद लेना ही काम खत्म नहीं है। अगले 5 साल तक जो कागज़ और जानकारी सँभालकर रखनी है, वह मैच्योरिटी के समय काम आती है। सबसे पहले खाते का विवरण — खाता संख्या, निवेश की तारीख, रकम और मैच्योरिटी की तारीख — एक सुरक्षित जगह नोट कर लें।

  • खाते का रिकॉर्ड: e-mode या पासबुक mode का विवरण, निवेश की रसीद और खाता संख्या सुरक्षित रखें।
  • नामांकन की जाँच: नामांकित व्यक्ति का नाम सही है या नहीं, यह समय-समय पर देख लें; बदलाव हो तो डाकघर से अपडेट करवाएँ।
  • ट्रांसफर की सुविधा: ज़रूरत पड़ने पर NSC खाता एक डाकघर से दूसरे डाकघर में ट्रांसफर किया जा सकता है, और नियमानुसार पात्र व्यक्ति को भी ट्रांसफर संभव है — इसके लिए डाकघर की प्रक्रिया अपनानी होती है।
  • लोन के लिए गिरवी: NSC को बैंक या वित्तीय संस्था के पास लोन के लिए गिरवी रखा जा सकता है। इसमें पोस्टमास्टर द्वारा ट्रांसफर स्टैंप लगाया जाता है — यह सुविधा पैसा बिना तोड़े ज़रूरत पूरी करने में मदद करती है।
  • गुम होने पर डुप्लिकेट: अगर NSC का प्रमाणपत्र या रिकॉर्ड गुम, चोरी या खराब हो जाए, तो डाकघर में डुप्लिकेट के लिए आवेदन किया जा सकता है — इसके लिए निर्धारित फॉर्म भरना होता है।
  • मैच्योरिटी की तैयारी: मैच्योरिटी से कुछ हफ्ते पहले ही पहचान प्रमाण और खाते का विवरण तैयार रखें, ताकि पैसा लेने में देरी न हो।

एक और ज़रूरी बात — NSC का पैसा मैच्योरिटी पर ही मिलता है, बीच में ब्याज हाथ में नहीं आता। इसलिए 5 साल के दौरान हर साल ब्याज की रसीद या स्टेटमेंट देखने की उम्मीद न रखें। खाते का विवरण डाकघर से समय-समय पर ज़रूर चेक करते रहें, ताकि कोई गलती हो तो वह पहले ही पकड़ में आ जाए।

NSC में निवेश की फीस और खर्च

NSC खरीदने के लिए कोई अलग “निवेश फीस” नहीं देनी होती — आप जितना निवेश करते हैं, वही रकम खाते में जमा होती है। डुप्लिकेट प्रमाणपत्र या ट्रांसफर जैसे कुछ कामों पर योजना के नियमों के अनुसार शुल्क लग सकता है, जिसकी जानकारी डाकघर से पहले ही ले लेनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति NSC खरीदने के नाम पर आपसे अलग से पैसे माँगे, तो समझ जाएँ कि वह आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है।

काम खर्च की स्थिति
NSC खरीदना (निवेश) कोई अलग निवेश फीस नहीं — पूरी रकम खाते में जमा होती है
मैच्योरिटी पर पैसा लेना कोई अलग शुल्क नहीं; टैक्स का हिसाब अलग से करना होता है
डुप्लिकेट प्रमाणपत्र / ट्रांसफर नियमानुसार शुल्क लग सकता है — रकम डाकघर से पहले ही पूछ लें
किसी एजेंट से NSC खरीदवाना यह आधिकारिक तरीका नहीं है — ऐसा चार्ज देने से बचें, और अपनी जानकारी किसी को न दें

हम सरकारी वेबसाइट नहीं हैं, इसकी पूरी जानकारी भी यही बताती है कि Sarkari Sakha सिर्फ समझाने का काम करती है, पैसा लेने का नहीं। NSC से जुड़ा कोई भी भुगतान सिर्फ डाकघर में ही करें, किसी व्यक्ति के निजी खाते में नहीं।

NSC में दिक्कत आए तो क्या करें?

NSC में दिक्कतें ज़्यादातर कागज़ी या जानकारी की कमी से होती हैं, किसी बड़ी गड़बड़ी से नहीं। नीचे दी गई टेबल में आम समस्या, उसकी संभावित वजह और क्या करना है, यह तीनों साफ दिए गए हैं।

समस्या संभावित कारण क्या करें
पुरानी दर (जैसे 8.5% या ₹100 न्यूनतम) किसी लेख में दिखी पुराने लेख या पुरानी योजना की जानकारी सिर्फ मौजूदा नियम मानें — VIII Issue में न्यूनतम ₹1,000 है और अक्टूबर–दिसंबर 2026 में दर 7.7% है
ऑनलाइन NSC खरीदने का विकल्प नहीं दिख रहा डाकघर बचत खाता या इंटरनेट बैंकिंग चालू नहीं है, या विकल्प हर खाते में एक जैसा नहीं है डाकघर जाकर खरीदें — यही सबसे भरोसेमंद रास्ता है; ऑनलाइन विकल्प के लिए डाकघर से खाते की स्थिति पूछें
मैच्योरिटी की रकम हिसाब से थोड़ी अलग दिख रही है राउंडिंग का फर्क या गलत दर से गणना खरीद के दिन की दर और 5 साल की सालाना चक्रवृद्धि से दोबारा हिसाब लगाएँ; फिर भी फर्क हो तो डाकघर से गणना लिखित में लें
समय से पहले पैसा चाहिए, पर NSC बंद नहीं हो रहा NSC में आम तौर पर समय से पहले निकासी नहीं होती लोन के लिए NSC गिरवी रखने का विकल्प देखें, या डाकघर से नियमों के अनुसार रास्ता पूछें — गलत जानकारी देकर बंद कराने की कोशिश न करें
नाम या जन्म तिथि रिकॉर्ड से नहीं मिल रही KYC दस्तावेज़ों से फर्क पहले यह जानें कि फर्क कहाँ है, फिर डाकघर से सुधार की प्रक्रिया पूरी करें
NSC का रिकॉर्ड या प्रमाणपत्र गुम हो गया कागज़ खोना या खराब होना जिस डाकघर से NSC लिया था, वहाँ डुप्लिकेट के लिए निर्धारित फॉर्म से आवेदन करें
TDS कटेगा या नहीं, इस पर उलझन है FD की आदत से TDS की उम्मीद NSC पर कोई TDS नहीं कटता, पर 5वें साल का ब्याज ITR में दिखाकर टैक्स देना होता है
नामांकन (nominee) अपडेट नहीं हुआ नामांकन फॉर्म जमा नहीं हुआ या पुराना नाम ही दर्ज है डाकघर जाकर नामांकन की मौजूदा स्थिति चेक करें और ज़रूरत हो तो नया फॉर्म भरकर अपडेट करवाएँ

अगर डाकघर से बात करने के बाद भी समस्या सुलझ न रही हो, तो India Post की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था का रास्ता अपनाएँ। शिकायत में खाता संख्या, निवेश की तारीख और समस्या साफ लिखें, पर OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल कभी शिकायत में भी न लिखें। इस गाइड में सुधार के लिए हमसे संपर्क करें — अगर इस गाइड में कोई कदम या आँकड़ा बदला हुआ लगे, तो हमें बताएँ, ताकि गाइड को अपडेट किया जा सके; NSC खाते की शिकायत के लिए हमेशा आधिकारिक रास्ता ही इस्तेमाल करें।

NSC में सबसे बड़ी गलती जल्दबाज़ी में गलत जानकारी पर भरोसा करना है — हर आँकड़ा डाकघर या आधिकारिक अधिसूचना से ही पक्का करें।

एनएससी से जुड़े सवाल

एनएससी क्या है?

एनएससी यानी National Savings Certificate, भारत सरकार की एक छोटी बचत योजना है जो डाकघरों से मिलती है। इसमें एक बार पैसा जमा किया जाता है, उस पर 7.7% सालाना ब्याज सालाना चक्रवृद्धि से जुड़ता है और 5 साल पूरे होने पर जमा रकम के साथ पूरा ब्याज एक साथ मिलता है।

NSC पर अभी ब्याज दर कितनी है?

अक्टूबर–दिसंबर 2026 की तिमाही में NSC पर 7.7% सालाना ब्याज है। यह दर खरीद के दिन तय हो जाती है और पूरे 5 साल तक वही लागू रहती है, चाहे बाद की तिमाहियों में दर बदल जाए।

NSC में न्यूनतम कितना निवेश कर सकते हैं?

न्यूनतम ₹1,000 से शुरुआत होती है, उसके बाद ₹100 के गुणकों में कोई भी रकम लगाई जा सकती है। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, पर Section 80C की छूट कुल ₹1.5 लाख सालाना तक ही मिलती है।

क्या NSC को समय से पहले बंद कराया जा सकता है?

आम तौर पर नहीं। समय से पहले बंद करना सिर्फ तीन खास स्थितियों में संभव है — खाताधारक की मृत्यु, न्यायालय का आदेश, या गिरवी रखने वाले राजपत्रित अधिकारी द्वारा ज़ब्ती। इसके अलावा किसी भी वजह से समय से पहले निकासी नहीं होती।

NSC पर टैक्स कैसे लगता है?

निवेश पर Section 80C की छूट मिलती है (पुरानी टैक्स व्यवस्था में, कुल ₹1.5 लाख की सीमा के अंदर)। पहले 4 साल का ब्याज पुनर्निवेश माना जाकर छूट योग्य होता है, सिर्फ 5वें साल का ब्याज टैक्स योग्य होता है। NSC पर कोई TDS नहीं कटता, पर 5वें साल का ब्याज ITR में दिखाना होता है।

NSC ऑनलाइन कैसे खरीदें?

जिनका डाकघर बचत खाता और DOP इंटरनेट बैंकिंग चालू है, वे इंटरनेट बैंकिंग में General Services के अंदर NSC खाता खोलने का विकल्प देख सकते हैं। अगर यह विकल्प न दिखे, तो नज़दीकी डाकघर जाकर खरीदना ही सबसे भरोसेमंद रास्ता है

NSC और PPF में कौन बेहतर है?

दोनों का काम अलग है। NSC 5 साल का एकमुश्त निवेश है जिसकी दर 7.7% है, जबकि PPF 15 साल का निवेश है जिसकी दर 7.1% है पर उसका ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। 5 साल के लक्ष्य के लिए NSC और लंबी अवधि के लिए PPF ज़्यादा उपयुक्त माना जाता है।

NSC की मैच्योरिटी पर पैसा कैसे मिलेगा?

5 साल पूरे होने पर जमा रकम और सारा ब्याज एक साथ मिलता है। NSC अपने आप आगे नहीं बढ़ता, इसलिए आगे निवेश जारी रखना हो तो नया NSC खरीदना होता है। मैच्योरिटी का पैसा लेने के लिए खाते का विवरण और पहचान प्रमाण के साथ डाकघर जाना होता है।

अंत में एक बात फिर से — NSC में निवेश करने से पहले यह तय कर लें कि यह पैसा 5 साल तक नहीं चाहिए, क्योंकि समय से पहले निकासी आम तौर पर संभव नहीं है। एनएससी क्या है, इस पर कितना ब्याज मिलता है और टैक्स का गणित क्या है, यह अब आप जान चुके हैं। सही रकम चुनें, नामांकन ज़रूर करें और खाते का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। Sarkari Sakha के ब्लॉग पर आने वाली गाइड्स में इसी तरह की आसान भाषा वाली जानकारी आगे भी मिलेगी, जब वह guides पब्लिश होंगी।

⚠️ हम सरकारी वेबसाइट नहीं हैं। SarkariSakha.com एक निजी सूचना वेबसाइट है। यह किसी सरकारी विभाग, India Post या किसी बैंक की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। NSC खरीदना, मैच्योरिटी का पैसा लेना या कोई भी आवेदन सिर्फ आधिकारिक डाकघर या आधिकारिक पोर्टल पर करें — नीचे दिया गया आधिकारिक लिंक ही असली रास्ता है। SarkariSakha.com कभी आपसे OTP, पासवर्ड, Aadhaar नंबर या बैंक डिटेल नहीं माँगेगी।

लेखक के बारे में: यह गाइड Sarkari Sakha Team द्वारा लिखी गई है। Last updated: 4 November 2026। अगर कोई कदम या आँकड़ा बदला हुआ लगे, तो आधिकारिक पोर्टल पर जाँच करके हमें बताएँ, ताकि गाइड को तुरंत अपडेट किया जा सके।

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