इस गाइड में स्टैंड अप इंडिया लोन कैसे लें, इसका पूरा जवाब मिलेगा — कौन पात्र है, कितना लोन मिलता है, ब्याज कैसे तय होता है, कौन से दस्तावेज़ चाहिए और आवेदन कहाँ और कैसे करना है। जब कोई पहली बार लोन के लिए बैंक जाता है, तो सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि योजना का नाम सुन तो लिया, पर असली शर्तें क्या हैं — यह गाइड उसी उलझन को खत्म करने के लिए लिखी गई है।
✅ यह गाइड आधिकारिक सरकारी स्रोतों और अधिसूचनाओं पर आधारित है। Last verified: 4 November 2026। लोन से जुड़ी जानकारी, ब्याज दर और प्रक्रिया समय-समय पर बदल सकती है — कोई कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल और अपनी बैंक शाखा पर नवीनतम जानकारी ज़रूर क्रॉस-चेक करें।
30 सेकंड में जवाब: स्टैंड अप इंडिया योजना में SC/ST और महिला उद्यमियों को नया (ग्रीनफील्ड) बिज़नेस शुरू करने के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का कंपोजिट बैंक लोन मिलता है। आवेदक की उम्र 18 साल से ज़्यादा होनी चाहिए, बिज़नेस पहली बार शुरू हो रहा हो, और गैर-व्यक्तिगत संस्था में SC/ST या महिला उद्यमियों की कम से कम 51% हिस्सेदारी होनी चाहिए। आवेदन आधिकारिक पोर्टल, बैंक शाखा या Lead District Manager के ज़रिए किया जाता है।
- लोन: ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक, टर्म लोन + वर्किंग कैपिटल मिलाकर।
- कौन: SC/ST उद्यमी और/या महिला उद्यमी, उम्र 18 साल या ज़्यादा।
- किस काम के लिए: सिर्फ नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस — मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज़, ट्रेडिंग या कृषि-संबद्ध गतिविधि।
- ब्याज: कोई तय दर नहीं; बैंक की उस श्रेणी की सबसे कम लागू दर, जो MCLR + 3% + tenor premium से ज़्यादा नहीं होती।
- चुकाना: ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल में, 18 महीने तक के मोरेटोरियम के साथ।
| एक नज़र में | जानकारी |
|---|---|
| योजना | स्टैंड अप इंडिया — SC/ST और महिला उद्यमियों के लिए बैंक लोन की सुविधा |
| शुरुआत | 5 अप्रैल 2016, भारत सरकार (वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय; नोडल एजेंसी SIDBI) |
| लोन की राशि | ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक (कंपोजिट लोन: टर्म लोन + वर्किंग कैपिटल) |
| ब्याज दर | तय दर नहीं; बैंक की सबसे कम लागू दर, अधिकतम MCLR + 3% + tenor premium |
| चुकाने की अवधि | ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल, 18 महीने तक का मोरेटोरियम |
| आवेदन कहाँ | आधिकारिक पोर्टल standupmitra.in, बैंक शाखा, या Lead District Manager (LDM) |
| ध्यान रखने वाली बात | यह लोन-सुविधा योजना है, सब्सिडी योजना नहीं; मंज़ूरी बैंक के मूल्यांकन पर निर्भर करती है |
ऊपर दिए गए आंकड़ों के स्रोत: official portal (standupmitra.in) पर Stand Up India scheme guidelines और Department of Financial Services (financialservices.gov.in); nodal agency: Small Industries Development Bank of India (SIDBI); last verified 4 November 2026.
स्टैंड अप इंडिया योजना क्या है और यह किसके लिए है?
स्टैंड अप इंडिया भारत सरकार की एक योजना है जो SC/ST और महिला उद्यमियों को पहली बार अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए बैंक लोन दिलाने में मदद करती है। इसमें ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का कंपोजिट लोन मिलता है, जिसमें टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल दोनों शामिल होते हैं।
स्टैंड अप इंडिया योजना 5 अप्रैल 2016 को शुरू हुई थी। इसका मकसद यह है कि SC/ST समुदाय के लोग और महिला उद्यमी, जिन्हें आमतौर पर बिज़नेस के लिए बैंक से लोन लेने में ज़्यादा दिक्कत आती है, वे भी अपना उद्यम खड़ा कर सकें। यह योजना वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय के तहत चलती है और SIDBI इसकी नोडल एजेंसी है।
एक बात शुरुआत में ही साफ कर लें। यह योजना सीधे सरकार से पैसा नहीं देती, बल्कि बैंक से लोन दिलाने की सुविधा देती है। लोन अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) की शाखाओं से मिलता है, और मंज़ूरी, राशि और शर्तें बैंक अपने मूल्यांकन के हिसाब से तय करता है। इसलिए योजना में पात्र होना और लोन मंज़ूर होना, ये दो अलग बातें हैं।
Sarkari Sakha पर हम कोशिश करते हैं कि सरकारी योजना की जानकारी आसान भाषा में मिले, बिना किसी उलझन के। स्टैंड अप इंडिया लोन कैसे लें, यह जानने के बाद अक्सर अगला सवाल यही आता है कि बैंक में जाकर क्या कहना है और कौन से कागज़ ले जाने हैं — इस गाइड में वही सब कुछ क्रम से दिया गया है।
स्टैंड अप इंडिया लोन बिज़नेस शुरू करने का पहला कदम हो सकता है, पर लोन लेना ही कामयाबी नहीं है — सही प्रोजेक्ट,
सही लागत और सही चुकाने की योजना, तीनों का साथ होना ज़रूरी है।
स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए कौन पात्र है?
पात्रता — एक नज़र में: Stand Up India योजना SC/ST उद्यमियों और महिला उद्यमियों के लिए है, जिनकी उम्र 18 साल या उससे ज़्यादा हो — और यह सिर्फ़ नए greenfield बिज़नेस के लिए है; गैर-व्यक्तिगत संस्थाओं में SC/ST और/या महिलाओं की कम से कम 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण ज़रूरी है। (स्रोत: scheme guidelines on the official portal standupmitra.in; verified November 2026.)
पात्रता की शर्तें सीधी हैं, पर इन्हें ठीक से समझना ज़रूरी है क्योंकि एक भी शर्त पूरी न होने पर आवेदन आगे नहीं बढ़ता। सबसे पहली शर्त यह है कि आवेदक SC/ST समुदाय से हो और/या महिला उद्यमी हो। महिला उद्यमी किसी भी जाति या वर्ग की हो सकती हैं — महिला होने भर से वे इस योजना के दायरे में आती हैं।
दूसरी शर्त उम्र की है — आवेदक की उम्र 18 साल या उससे ज़्यादा होनी चाहिए। तीसरी शर्त यह है कि बिज़नेस नया हो, यानी ग्रीनफील्ड एंटरप्राइज हो। पहले से चल रहे बिज़नेस को बढ़ाने के लिए यह योजना नहीं है। चौथी शर्त यह है कि आवेदक किसी बैंक या वित्तीय संस्था का डिफॉल्टर न हो।
| कौन पात्र है | शर्त |
|---|---|
| SC/ST उद्यमी (व्यक्तिगत) | उम्र 18 साल या ज़्यादा; जाति/जनजाति प्रमाणपत्र; नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस; डिफॉल्टर नहीं |
| महिला उद्यमी (व्यक्तिगत) | उम्र 18 साल या ज़्यादा; किसी भी जाति/वर्ग की हो सकती हैं; नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस; डिफॉल्टर नहीं |
| गैर-व्यक्तिगत संस्था (फर्म, कंपनी आदि) | SC/ST और/या महिला उद्यमियों के पास कम से कम 51% शेयरहोल्डिंग और नियंत्रण होना चाहिए |
| कौन पात्र नहीं है | पहले से चल रहा बिज़नेस (ग्रीनफील्ड नहीं); 18 साल से कम उम्र; बैंक डिफॉल्टर; ऐसा उद्यम जो योजना के दायरे के सेक्टर में न आता हो |
गैर-व्यक्तिगत संस्थाओं के लिए 51% वाली शर्त को ध्यान से समझें। सिर्फ नाम के लिए महिला या SC/ST भागीदार होना काफी नहीं है — उनके पास शेयरहोल्डिंग के साथ-साथ नियंत्रण (controlling stake) भी होना चाहिए। बैंक इस बात की जाँच दस्तावेज़ों से करता है, इसलिए कागज़ों में हिस्सेदारी और नियंत्रण दोनों साफ दिखने चाहिए।
एक और ज़रूरी बात — योजना का मूल उद्देश्य यह था कि हर बैंक शाखा से कम से कम एक SC/ST उद्यमी और एक महिला उद्यमी को लोन मिले। इसका मतलब यह नहीं है कि हर आवेदन मंज़ूर हो जाएगा, पर इसका मतलब यह ज़रूर है कि बैंक शाखाओं से इस योजना के तहत आवेदन लेने की उम्मीद की जाती है। शाखा में जाकर योजना का नाम लेकर पूछने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
ग्रीनफील्ड एंटरप्राइज का क्या मतलब है?
एक वाक्य में कहें तो: Stand Up India के तहत greenfield enterprise का मतलब है पहली बार शुरू किया गया बिल्कुल नया बिज़नेस — पहले से चल रहा या विस्तार कर रहा बिज़नेस इसके लिए पात्र नहीं है। (स्रोत: scheme guidelines on standupmitra.in; verified November 2026.)
ग्रीनफील्ड एंटरप्राइज का सीधा मतलब है पहली बार शुरू किया जा रहा नया बिज़नेस। यानी जिस नाम से, जिस काम के लिए लोन माँगा जा रहा है, वह काम पहले कभी नहीं किया गया हो। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज़, ट्रेडिंग या कृषि-संबद्ध गतिविधि — इनमें से किसी भी सेक्टर में नया उद्यम शुरू किया जा सकता है।
उदाहरण से समझें। अगर कोई महिला पहली बार सिलाई का काम, ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, फूड प्रोसेसिंग यूनिट या छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करना चाहती है, तो वह ग्रीनफील्ड है। पर अगर वही बिज़नेस पहले से चल रहा है और उसे बड़ा करने के लिए लोन चाहिए, तो वह इस योजना के दायरे में नहीं आएगा — उसके लिए बैंक की दूसरी लोन योजनाओं के बारे में पूछना होगा।
जब मैंने पहली बार इस योजना के बारे में पढ़ा था, तो मुझे यही शब्द सबसे ज़्यादा उलझाने वाला लगा था। ग्रीनफील्ड सुनकर लगता है जैसे कोई ज़मीन या खेत की बात हो रही हो, पर असल में इसका मतलब सिर्फ इतना है कि बिज़नेस बिल्कुल नया हो, पहले से चला आ रहा काम न हो। यह फर्क समझ आते ही पात्रता की तस्वीर साफ हो जाती है।
स्टैंड अप इंडिया लोन कितना मिलता है और प्रोजेक्ट खर्च का कितना हिस्सा कवर होता है?
लोन राशि: composite loan के रूप में ₹10 lakh से ₹1 crore तक (term loan + working capital)। प्रोजेक्ट खर्च का लगभग 75% लोन से कवर होने की उम्मीद है, और उधारकर्ता को कम से कम 10% margin money के तौर पर खुद लगाना होगा। (स्रोत: scheme guidelines on standupmitra.in; verified November 2026.)
लोन की राशि ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक है। यह कंपोजिट लोन होता है, यानी इसमें टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल दोनों शामिल होते हैं। टर्म लोन से मशीनरी, उपकरण, दुकान की साज-सज्जा जैसी स्थायी चीज़ें खरीदी जाती हैं, और वर्किंग कैपिटल से रोज़मर्रा का खर्च — कच्चा माल, स्टॉक, उधारी — चलता है।
योजना के दिशा-निर्देशों के हिसाब से लोन से प्रोजेक्ट खर्च का 75% हिस्सा कवर होने की उम्मीद की जाती है। बाकी हिस्सा मार्जिन मनी कहलाता है। मार्जिन मनी ज़्यादा से ज़्यादा 25% तक हो सकती है, और इसमें से कम से कम 10% प्रोजेक्ट खर्च आवेदक को अपनी तरफ से लाना ही होता है। बाकी मार्जिन, पात्रता होने पर, केंद्र या राज्य सरकार की दूसरी योजनाओं के साथ convergence से पूरा हो सकता है।
| रकम का हिस्सा | कितना |
|---|---|
| कुल लोन (कंपोजिट) | ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक |
| लोन से कवर होने वाला प्रोजेक्ट खर्च | 75% तक (दिशा-निर्देशों के हिसाब से अपेक्षित) |
| आवेदक का अपना योगदान (कम से कम) | प्रोजेक्ट खर्च का कम से कम 10% |
| बाकी मार्जिन | पात्रता होने पर दूसरी सरकारी योजनाओं के convergence से (कुल मार्जिन 25% तक) |
| अंतिम फैसला | बैंक प्रोजेक्ट के मूल्यांकन के हिसाब से राशि तय करता है |
एक उदाहरण से यह हिसाब साफ हो जाता है। अगर प्रोजेक्ट का कुल खर्च ₹40 लाख है, तो लोन से करीब ₹30 लाख तक मिलने की उम्मीद की जा सकती है, और कम से कम ₹4 लाख आवेदक को अपनी तरफ से लाने होंगे। बाकी ₹6 लाख convergence से या अपने स्रोत से पूरे हो सकते हैं। यह सिर्फ समझाने के लिए एक उदाहरण है — असली राशि बैंक आपके प्रोजेक्ट की जाँच के बाद ही तय करेगा।
ध्यान रखें, ₹1 करोड़ की ऊपरी सीमा का मतलब यह नहीं है कि हर किसी को ₹1 करोड़ ही मिलेगा। लोन की राशि प्रोजेक्ट की ज़रूरत, उसकी लागत और आपकी चुकाने की क्षमता पर निर्भर करती है। छोटा प्रोजेक्ट हो तो ₹10–15 लाख का लोन भी इसी योजना में मिल सकता है।
स्टैंड अप इंडिया लोन की ब्याज दर कैसे तय होती है?
स्टैंड अप इंडिया लोन की कोई एक तय ब्याज दर नहीं है। दिशा-निर्देशों के हिसाब से ब्याज दर वह सबसे कम लागू दर होती है जो बैंक उस श्रेणी (rating category) के लिए देता है, और यह दर बैंक के MCLR + 3% + tenor premium से ज़्यादा नहीं हो सकती। इसका मतलब यह है कि ब्याज दर हर बैंक में और हर आवेदक के मामले में अलग-अलग हो सकती है।
ब्याज दर: Stand Up India की कोई तय ब्याज दर नहीं है — बैंक उस उधारकर्ता श्रेणी के लिए अपनी सबसे कम लागू दर लेता है, जो MCLR + 3% + tenor premium से ज़्यादा नहीं हो सकती। (स्रोत: scheme guidelines on standupmitra.in; verified November 2026.)
MCLR का मतलब है Marginal Cost of Funds based Lending Rate — वह दर जिस पर बैंक खुद पैसा जुटाता है। इसके ऊपर 3% और tenor premium जुड़ता है, पर कुल दर बैंक की उस श्रेणी की सबसे कम लागू दर से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। इसलिए बैंक से बात करते समय सिर्फ “ब्याज कितना लगेगा” पूछना काफी नहीं है — यह भी पूछें कि दर किस आधार पर तय हुई है, वह फिक्स्ड है या फ्लोटिंग, और EMI कितनी बनेगी।
एक ईमानदार बात यह भी जान लें। कुछ वेबसाइट्स पर इस योजना के लिए 8% से 12% जैसी तय दरें लिखी मिलती हैं, पर यह आधिकारिक तय दर नहीं है। ऐसी किसी दर को पक्का मानकर प्रोजेक्ट का हिसाब न लगाएँ। असली दर वही है जो आपका बैंक आपके प्रोजेक्ट और प्रोफाइल के हिसाब से बताएगा, और वही दर लोन के कागज़ों में लिखी होगी।
EMI का अंदाज़ा लगाने के लिए बैंक से ही EMI चार्ट माँगें। लोन की राशि, ब्याज दर और अवधि बताते ही बैंक आपको महीने की किस्त बता देगा। किस्त तय करते समय यह भी देखें कि शुरुआती महीनों में मोरेटोरियम का फायदा मिल रहा है या नहीं, क्योंकि उस दौरान बिज़नेस अभी कमाई शुरू कर रहा होता है।
लोन चुकाने की अवधि और मोरेटोरियम क्या है?
स्टैंड अप इंडिया लोन ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल में चुकाना होता है, और इसमें 18 महीने तक का मोरेटोरियम मिल सकता है। मोरेटोरियम का मतलब है वह शुरुआती अवधि जिसमें मूलधन की किस्त नहीं देनी होती — बिज़नेस को खड़ा होने का समय मिलता है। मोरेटोरियम के दौरान ब्याज के नियम बैंक के हिसाब से तय होते हैं, इसलिए यह ज़रूर पूछ लें कि उस अवधि में ब्याज लगेगा या नहीं, और वह कैसे वसूला जाएगा।
7 साल की अवधि और 18 महीने का मोरेटोरियम, दोनों ही ऊपरी सीमाएँ हैं — हर किसी को पूरी अवधि या पूरा मोरेटोरियम मिलना तय नहीं है। बैंक प्रोजेक्ट के हिसाब से अवधि तय करता है। छोटा प्रोजेक्ट हो तो अवधि कम भी हो सकती है। इसलिए आवेदन के समय ही यह साफ कर लें कि आपकी किस्त कब से शुरू होगी और कितने समय तक चलेगी।
वर्किंग कैपिटल, ओवरड्राफ्ट और RuPay कार्ड कैसे काम करते हैं?
कंपोजिट लोन के दो हिस्से होते हैं — टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल। टर्म लोन एकमुश्त मिलता है और किस्तों में चुकता है। वर्किंग कैपिटल रोज़मर्रा के खर्च के लिए होता है, और इसे निकालने का तरीका राशि पर निर्भर करता है। ₹10 लाख तक की वर्किंग कैपिटल ओवरड्राफ्ट के रूप में मंज़ूर हो सकती है, और इसके लिए RuPay डेबिट कार्ड जारी किया जाता है ताकि ज़रूरत के समय पैसा आसानी से निकाला जा सके।
₹10 लाख से ज़्यादा की वर्किंग कैपिटल आम तौर पर कैश क्रेडिट लिमिट के रूप में मंज़ूर होती है। इसका मतलब यह है कि छोटी रकम के लिए कार्ड से काम चल जाता है, पर बड़ी रकम के लिए बैंक खाते में एक लिमिट तय कर देता है जिसके अंदर से पैसा इस्तेमाल किया जाता है। दोनों ही तरीकों में ब्याज सिर्फ उतनी रकम पर लगता है जितनी असल में इस्तेमाल हुई हो — यह बात टर्म लोन से अलग है, जहाँ पूरी रकम पर ब्याज चलता है।
RuPay कार्ड को लेकर एक गलतफहमी दूर कर लें। RuPay कार्ड कोई अलग फायदा या सब्सिडी नहीं है — यह वर्किंग कैपिटल को इस्तेमाल करने का एक सुविधाजनक तरीका है। कार्ड मिलने का मतलब यह नहीं है कि पैसा मुफ्त मिल गया है; कार्ड से निकाला गया हर रुपया लोन का हिस्सा है और उसे चुकाना होता है।
स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
दस्तावेज़ — एक नज़र में: पहचान और पते का प्रमाण, जाति प्रमाणपत्र (SC/ST आवेदकों के लिए), विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और बिज़नेस-परिसर के कागज़ात — पूरी लिस्ट नीचे टेबल में दी गई है।
दस्तावेज़ों की तैयारी पहले से कर लें, तो बैंक के चक्कर कम लगेंगे। नीचे दी गई लिस्ट आम तौर पर माँगे जाने वाले दस्तावेज़ों की है — बैंक आपके मामले में कुछ और कागज़ भी माँग सकता है, इसलिए इसे अंतिम लिस्ट न मानें, बल्कि तैयारी की शुरुआती लिस्ट मानें।
| दस्तावेज़ | किस काम आता है |
|---|---|
| पहचान प्रमाण (Aadhaar, PAN, Voter ID, पासपोर्ट में से) | आवेदक की पहचान की पुष्टि के लिए |
| पता प्रमाण (बिजली/टेलीफोन बिल, प्रॉपर्टी टैक्स रसीद, किराया एग्रीमेंट) | निवास और बिज़नेस पते की पुष्टि के लिए |
| जाति प्रमाणपत्र (SC/ST आवेदकों के लिए) | श्रेणी की पात्रता साबित करने के लिए; महिला उद्यमियों के लिए जाति प्रमाणपत्र ज़रूरी नहीं है |
| प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) — लागत, मशीनरी, सप्लायर, अनुमानित कमाई, कर्मचारी | बैंक यह देखता है कि प्रोजेक्ट व्यवहारिक है या नहीं और लोन चुकाया जा सकेगा या नहीं |
| बैंक स्टेटमेंट (आमतौर पर पिछले 6 महीने के) | आर्थिक स्थिति और लेन-देन की आदत समझने के लिए |
| प्रमोटर/गारंटर की संपत्ति-देनदारी का विवरण, ITR (लागू हो तो) | चुकाने की क्षमता के मूल्यांकन के लिए |
| गैर-व्यक्तिगत संस्था के लिए: पार्टनरशिप डीड / MoA / AoA, निगमन प्रमाणपत्र | 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण साबित करने के लिए |
| दुकान/जगह के कागज़ — लीज डीड या किराया एग्रीमेंट | बिज़नेस कहाँ चलेगा, इसकी पुष्टि के लिए |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो, भरा हुआ आवेदन फॉर्म | आवेदन की औपचारिकता के लिए |
सबसे ज़्यादा मेहनत प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर लगती है, और वही सबसे ज़्यादा काम आती है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में यह साफ होना चाहिए कि क्या बेचा जाएगा या कौन सी सेवा दी जाएगी, मशीनरी और कच्चा माल कहाँ से आएगा, कुल खर्च कितना है, कमाई का अनुमान क्या है और कितने लोगों को रोज़गार मिलेगा। जो रिपोर्ट सिर्फ आँकड़ों से भरी हो पर ज़मीन पर उतरती न दिखे, वह बैंक को प्रभावित नहीं करती।
एक सुरक्षा बात अभी से पक्की कर लें। लोन के नाम पर कोई भी व्यक्ति या एजेंट आपसे फीस, कमीशन या “लोन पास करवाने” के पैसे माँगे, तो समझ जाएँ कि वह सही रास्ता नहीं है। आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आवेदन के लिए कोई फीस नहीं देनी होती, और बैंक की अपनी प्रक्रिया में भी किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं है।
स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए आवेदन कैसे करें?
स्टैंड अप इंडिया लोन कैसे लें, इस सवाल का जवाब तीन रास्तों में है। पहला रास्ता है सीधे बैंक शाखा में जाना, दूसरा है आधिकारिक पोर्टल standupmitra.in पर ऑनलाइन आवेदन करना, और तीसरा है अपने ज़िले के Lead District Manager (LDM) से संपर्क करना। तीनों रास्ते आधिकारिक हैं — जो रास्ता आपके लिए आसान हो, वही चुनें।
- सबसे पहले अपनी पात्रता खुद जाँच लें — उम्र 18 साल या ज़्यादा, SC/ST और/या महिला उद्यमी, नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस, डिफॉल्टर नहीं।
- अपना बिज़नेस तय करें और उसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें — क्या काम होगा, कुल खर्च कितना है, मशीनरी और कच्चा माल कहाँ से आएगा, कमाई का अनुमान क्या है।
- आधिकारिक पोर्टल standupmitra.in पर रजिस्टर करें — बिज़नेस का स्थान, अपनी श्रेणी (SC/ST/महिला), बिज़नेस का प्रकार, लोन की राशि, जगह और अनुभव की जानकारी भरें।
- अगर ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने में मदद या मेंटरशिप चाहिए, तो पोर्टल पर handholding का विकल्प चुनें — पहली बार आवेदन करने वालों के लिए यही मदद सबसे काम की होती है।
- फॉर्म जमा करने के बाद आपका आवेदन संबंधित बैंक शाखा को भेज दिया जाता है; बैंक के अधिकारी आपसे सीधे संपर्क करके आगे की औपचारिकता पूरी करते हैं।
- बैंक दस्तावेज़ों की जाँच करता है, प्रस्तावित जगह का दौरा कर सकता है और प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करके लोन मंज़ूर करता है।
- मंज़ूरी के बाद अपना मार्जिन मनी (कम से कम 10% अपना योगदान) जमा करें, जिसके बाद लोन की रकम किस्तों में या तय शर्तों के हिसाब से जारी होती है।
अगर ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत आए, तो सीधे बैंक शाखा जाना सबसे भरोसेमंद रास्ता है। शाखा में जाकर योजना का नाम लेकर पूछें, पात्रता बताएँ और दस्तावेज़ों की लिस्ट माँगें। कई बार पोर्टल पर अटका हुआ काम शाखा में एक मुलाकात से आगे बढ़ जाता है। LDM का रास्ता भी इसी काम आता है — LDM ज़िले में बैंकों और आवेदकों के बीच समन्वय का काम करता है।
आवेदन जमा करने के बाद उसका नंबर या रसीद सँभाल कर रखें। बैंक से हर बातचीत की तारीख और अधिकारी का नाम नोट करें, ताकि बाद में पूछताछ करते समय आपको भटकना न पड़े। आवेदन की स्थिति के बारे में बैंक से ही पूछें — किसी बिचौलिए से स्थिति पता करने के लिए पैसे देने की ज़रूरत नहीं है।
बैंक से बात करने से पहले क्या तैयार रखें?
बैंक में जाने से पहले तीन चीज़ें तैयार रखें तो बातचीत आधी आसान हो जाती है। पहली, अपना बिज़नेस साफ शब्दों में बताने की तैयारी — क्या बेचेंगे या कौन सी सेवा देंगे, ग्राहक कौन होंगे, और सामान कहाँ से आएगा। दूसरी, खर्च का मोटा-मोटा हिसाब — मशीनरी, किराया, कच्चा माल, कर्मचारी — ताकि बैंक को लगे कि आपने ज़मीनी तैयारी की है। तीसरी, चुकाने की योजना — कमाई कब से शुरू होगी और किस्त कैसे निकलेगी।
प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाते समय एक गलती से बचें — कमाई को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना। बैंक ऐसी रिपोर्ट को पहचान लेता है, और उससे भरोसा कम होता है, बढ़ता नहीं है। कमाई का अनुमान ईमानदार रखें, खर्च का अनुमान थोड़ा ज़्यादा रखें, और यह भी लिखें कि अगर शुरुआती महीनों में कमाई कम हुई तो किस्त कैसे निकलेगी। यही ईमानदारी बैंक का भरोसा बनाती है।
सब्सिडी, गारंटी और कोलैटरल का सच क्या है?
स्टैंड अप इंडिया को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि इसे सब्सिडी समझ लिया जाता है। यह सब्सिडी योजना नहीं है — यह लोन-सुविधा योजना है। लोन की रकम ब्याज सहित चुकानी होती है। हाँ, मार्जिन का एक हिस्सा पात्रता होने पर दूसरी सरकारी योजनाओं के convergence से पूरा हो सकता है, पर वह अलग योजनाओं का लाभ है, इस योजना की सब्सिडी नहीं।
गारंटी और कोलैटरल के बारे में भी सच जान लें। दिशा-निर्देशों के हिसाब से लोन के लिए कोलैटरल सिक्योरिटी या Credit Guarantee Fund Scheme for Stand-Up India Loans (CGFSIL) की गारंटी, बैंक के फैसले के हिसाब से ली जा सकती है। इसका मतलब यह है कि गारंटी अपने आप नहीं मिल जाती — बैंक तय करता है कि किस मामले में क्या लगेगा। इसलिए “बिना गारंटी लोन पक्का है” जैसी बात पर भरोसा न करें।
एक नया घटनाक्रम भी जान लें, ताकि पुरानी जानकारी से भ्रम न हो। संसद में दिए गए जवाब के हिसाब से मूल योजना मार्च 2025 तक वैध/संचालित थी, और केंद्रीय बजट 2025-26 में पहली बार बिज़नेस शुरू करने वाली 5 लाख महिला, SC/ST उद्यमियों के लिए ₹2 करोड़ तक के टर्म लोन वाले विस्तारित संस्करण की घोषणा हुई है।
इसका मतलब यह है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल और अपनी बैंक शाखा पर नए नियम ज़रूर जाँच लें — हो सकता है कि राशि की सीमा या शर्तों में बदलाव हो गया हो। इस गाइड में दी गई ₹10 लाख से ₹1 करोड़ की सीमा मूल योजना के दिशा-निर्देशों पर आधारित है।
लोन का सबसे बड़ा सच यह है कि मंज़ूरी बैंक देता है, योजना नहीं — इसलिए बैंक की शर्तों को समझना ही योजना को समझना है।
स्टैंड अप इंडिया लोन अटक जाए या रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
अगर आपका Stand Up India लोन अटका हुआ है या ख़ारिज हो गया है, तो समाधान कारण पर निर्भर करता है — नीचे दी गई टेबल में हर आम समस्या, उसकी संभावित वजह और अगला कदम दिया गया है।
लोन अटकना या रिजेक्ट होना आम बात है, और अक्सर वजह छोटी होती है — अधूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट, गलत श्रेणी का प्रमाणपत्र, या प्रोजेक्ट का हिसाब बैंक को न समझ आना। नीचे दी गई टेबल में आम समस्या, उसकी संभावित वजह और क्या करना है, यह तीनों साफ दिए गए हैं।
| समस्या | संभावित कारण | क्या करें |
|---|---|---|
| बैंक कहता है आप पात्र नहीं हैं | बिज़नेस ग्रीनफील्ड नहीं है, उम्र कम है, या 51% हिस्सेदारी साफ नहीं है | पात्रता की शर्तें फिर से पढ़ें, गलतफहमी हो तो दस्तावेज़ दिखाकर स्पष्ट करें; सच में पात्र न हों तो बैंक की दूसरी लोन योजना पूछें |
| प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं | कमाई का अनुमान अव्यवहारिक है या लागत का हिसाब अधूरा है | रिपोर्ट को ईमानदार आँकड़ों से दोबारा बनाएँ, सप्लायर के कोटेशन और खर्च के सबूत जोड़ें, handholding मदद लें |
| पोर्टल पर आवेदन आगे नहीं बढ़ रहा | फॉर्म अधूरा है, दस्तावेज़ अपलोड नहीं हुए, या बैंक को आवेदन नहीं पहुँचा | आवेदन नंबर से स्थिति जाँचें, फिर सीधे संबंधित बैंक शाखा में जाकर पूछें; LDM से भी संपर्क कर सकते हैं |
| लोन की राशि कम मंज़ूर हुई | बैंक ने प्रोजेक्ट लागत या चुकाने की क्षमता कम आँकी है | बैंक से वजह लिखित में समझें, प्रोजेक्ट लागत के सबूत दें; ज़रूरत हो तो छोटा प्रोजेक्ट बनाकर दोबारा आवेदन करें |
| कोलैटरल या गारंटी माँगी जा रही है | बैंक ने अपने मूल्यांकन में सुरक्षा तय की है | बैंक से CGFSIL गारंटी के विकल्प पर बात करें; बिना समझे कोई संपत्ति गिरवी न रखें |
| कोई एजेंट पैसे माँग रहा है | लोन दिलाने के नाम पर ठगी | किसी को पैसे न दें, न OTP/पासवर्ड/बैंक डिटेल शेयर करें; सीधे बैंक शाखा या LDM से संपर्क करें |
| ब्याज दर उम्मीद से ज़्यादा बताई गई | श्रेणी या अवधि के हिसाब से दर अलग तय हुई है | बैंक से दर का आधार लिखित में पूछें (MCLR + 3% + tenor premium की सीमा), दूसरे बैंक से भी तुलना करें |
अगर बैंक से बात करने के बाद भी समस्या सुलझ न रही हो, तो LDM से संपर्क करना अगला कदम है। LDM ज़िले में बैंकों के साथ समन्वय करता है और पहली बार आवेदन करने वालों की मदद के लिए ही होता है। इस गाइड में सुधार के लिए हमसे संपर्क करें — अगर इस गाइड में कोई कदम बदला हुआ लगे, तो हमें बताएँ, ताकि गाइड को अपडेट किया जा सके; लोन की मंज़ूरी के लिए हमेशा बैंक का आधिकारिक रास्ता ही इस्तेमाल करें।
लोन रिजेक्ट होना बिज़नेस के सपने का अंत नहीं है — अक्सर वजह छोटी होती है, और उसे ठीक करके दोबारा आवेदन किया जा सकता है।
स्टैंड अप इंडिया लोन में कोई फीस लगती है?
सीधा जवाब यह है कि आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आवेदन के लिए कोई फीस नहीं देनी होती। स्टैंड अप इंडिया लोन कैसे लें, यह जानने के बाद अक्सर दूसरा सवाल फीस का ही आता है, और इसलिए अगर कोई आपसे लोन दिलाने के नाम पर पैसे माँगे, तो समझ जाएँ कि वह सही रास्ता नहीं है।
| काम | फीस की स्थिति |
|---|---|
| पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आवेदन | फ्री (आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन के लिए कोई फीस नहीं) |
| बैंक की प्रक्रिया (प्रोसेसिंग आदि) | बैंक की अपनी नीति के हिसाब से हो सकती है — राशि और शर्तें बैंक से लिखित में पूछें, अनुमान पर भरोसा न करें |
| किसी एजेंट या बिचौलिए को भुगतान | यह योजना का हिस्सा नहीं है — ऐसा चार्ज देने से बचें, और अपनी जानकारी किसी को न दें |
एक चेतावनी हमेशा याद रखें। लोन के लिए आपको कभी कोई “सिक्योरिटी फीस”, “फाइल चार्ज” या “जल्दी मंज़ूरी” के नाम पर किसी व्यक्ति को पैसे नहीं देने हैं। हम सरकारी वेबसाइट नहीं हैं, इसकी पूरी जानकारी भी यही बताती है कि Sarkari Sakha सिर्फ समझाने का काम करती है, पैसा लेने का नहीं।
स्टैंड अप इंडिया लोन से जुड़े सवाल
स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए कौन पात्र है?
SC/ST समुदाय के उद्यमी और/या महिला उद्यमी पात्र हैं, जिनकी उम्र 18 साल या ज़्यादा हो और जो नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस शुरू करना चाहते हों। गैर-व्यक्तिगत संस्था में SC/ST और/या महिला उद्यमियों की कम से कम 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण होना चाहिए, और आवेदक किसी बैंक का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए।
स्टैंड अप इंडिया लोन कितना मिलता है?
₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का कंपोजिट लोन मिलता है, जिसमें टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल दोनों शामिल होते हैं। दिशा-निर्देशों के हिसाब से लोन से प्रोजेक्ट खर्च का 75% तक कवर होने की उम्मीद की जाती है, और आवेदक को कम से कम 10% अपना योगदान लाना होता है। अंतिम राशि बैंक प्रोजेक्ट के मूल्यांकन के बाद तय करता है।
स्टैंड अप इंडिया लोन की ब्याज दर कितनी होती है?
इसकी कोई एक तय दर नहीं है। ब्याज दर बैंक की उस श्रेणी की सबसे कम लागू दर होती है, जो MCLR + 3% + tenor premium से ज़्यादा नहीं हो सकती। इसलिए असली दर वही है जो आपका बैंक आपके मामले में बताएगा — किसी वेबसाइट पर लिखी दर को पक्का न मानें।
क्या स्टैंड अप इंडिया लोन एक सब्सिडी है?
नहीं, यह सब्सिडी योजना नहीं है। यह बैंक लोन की सुविधा देने वाली योजना है — लोन की रकम ब्याज सहित चुकानी होती है। मार्जिन का एक हिस्सा पात्रता होने पर दूसरी सरकारी योजनाओं के convergence से पूरा हो सकता है, पर वह अलग योजनाओं का लाभ है, इस योजना की सब्सिडी नहीं।
क्या बिना कोलैटरल के लोन मिल सकता है?
यह बैंक के फैसले पर निर्भर करता है। दिशा-निर्देशों के हिसाब से कोलैटरल सिक्योरिटी या CGFSIL की गारंटी, बैंक के मूल्यांकन के हिसाब से ली जा सकती है। गारंटी अपने आप नहीं मिल जाती, इसलिए बैंक से इस बारे में पहले ही साफ बात कर लें और बिना समझे कोई संपत्ति गिरवी न रखें।
स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए आवेदन कहाँ करें?
तीन आधिकारिक रास्ते हैं — आधिकारिक पोर्टल standupmitra.in पर ऑनलाइन आवेदन, सीधे किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की शाखा में जाकर, या अपने ज़िले के Lead District Manager (LDM) से संपर्क करके। जो रास्ता आपके लिए आसान हो, वही चुनें; किसी एजेंट को पैसे देने की ज़रूरत नहीं है।
पहले से चल रहे बिज़नेस के लिए क्या यह लोन मिलेगा?
नहीं, यह योजना सिर्फ नए ग्रीनफील्ड बिज़नेस के लिए है। पहले से चल रहे बिज़नेस को बढ़ाने के लिए इस योजना में लोन नहीं मिलता — उसके लिए बैंक की दूसरी लोन योजनाओं के बारे में शाखा में पूछें।
stand up india loan kaise le?
इस सवाल का जवाब एक ही गाइड में मिलता है — पहले पात्रता जाँचें (SC/ST और/या महिला उद्यमी, 18+ उम्र, नया ग्रीनफील्ड बिज़नेस), फिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें, और फिर standupmitra.in पर ऑनलाइन आवेदन करें या सीधे बैंक शाखा या LDM से संपर्क करें। बैंक दस्तावेज़ और प्रोजेक्ट की जाँच के बाद लोन मंज़ूर करता है।
अंत में एक बात फिर से — स्टैंड अप इंडिया लोन कैसे लें, यह अब आप जान चुके हैं: पात्रता जाँचें, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें, सही रास्ते से आवेदन करें और बैंक की शर्तों को लिखित में समझें। लोन लेना बिज़नेस की शुरुआत है, मंज़िल नहीं — कमाई, खर्च और किस्त का हिसाब पहले से साफ रखना ही कामयाबी की असली तैयारी है। Sarkari Sakha के ब्लॉग पर आने वाली गाइड्स में इसी तरह की आसान भाषा वाली जानकारी आगे भी मिलेगी, जब वह guides पब्लिश होंगी।
⚠️ हम सरकारी वेबसाइट नहीं हैं। SarkariSakha.com एक निजी सूचना वेबसाइट है। यह किसी सरकारी विभाग, SIDBI या किसी बैंक की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। स्टैंड अप इंडिया लोन के लिए आवेदन सिर्फ आधिकारिक पोर्टल या बैंक शाखा से करें — नीचे दिया गया आधिकारिक लिंक ही असली पोर्टल है। SarkariSakha.com कभी आपसे OTP, पासवर्ड, Aadhaar नंबर या बैंक डिटेल नहीं माँगेगी।
आधिकारिक पोर्टल: स्टैंड अप इंडिया पोर्टल — standupmitra.in | वित्तीय सेवा विभाग — financialservices.gov.in
लेखक के बारे में: यह गाइड Sarkari Sakha Team द्वारा लिखी गई है। Last updated: 4 November 2026। अगर कोई कदम या नंबर बदला हुआ लगे, तो आधिकारिक पोर्टल पर जाँच करके हमें बताएँ, ताकि गाइड को तुरंत अपडेट किया जा सके।








